कोटद्वार में डिप्लोमा इंजीनियरर्स की हड़ताल तीसरे दिन भी रही जारी

एनसीपी न्यूज़। कोटद्वार। उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले मंगलवार को डिप्लोमा इंजीनियर्स ने 27 सूत्रीय माँगो को लेकर इ. शशिभुषण लिंगवाल की अध्यक्षता में लगातार तीसरे दिन भी हड़ताल कर धरना प्रदर्शन किया।

सदस्यों को संबोधित करते हुए महासंघ के अध्यक्ष कौशिद अली ने कहा कि महासंघ लगातार चरणबद्ध आंदोलनों के तहत हड़ताल आयोजित कर रहा है बावजूद इसके सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नही दे रही है। उन्होंने अपनी 27 मांगे माँगे गिनाई जो निम्नवत है।
01 जनवरी, 2014 के पश्चात् विभागों में नियुक्त कनिष्ठ अभियन्ता को प्रथम एम०ए०सी०पी० के रूप में 10 10 वर्ष वर्ष की सेवा पूर्ण किये जाने पर पूर्व की भांति ग्रेड-पे रू0 5400 (लेवल-10) दिया जाये।
प्रदेश के अभियन्ताओं हेतु 1 अक्टूबर 2005 से लागू अंशदायी पेंशन योजना (NPS) व 1 अप्रैल 2025 से लागू एकीकृत पेंशन योजना (UPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) बहाल की जाय।
5. उत्तराखण्ड पेयजल निगम एवं उत्तराखण्ड जल संस्थान का राजकीयकरण /एकीकरण किया जाय।

6. विभिन्न अभियन्त्रण विभागों में डिप्लोमा इंजीनियर्स के पदोन्नति के अवसर कम होने के कारण, सहायक अभियन्ता से उच्चतर पदों पर पदोन्नति हेतु अन्य पर्वतीय छोटे राज्यों के समान, समानान्तर गैलरी का सृजन किया जाये। डिग्रीधारी कनिष्ठ अभियन्ताओं के पदोन्नति के ठहराव को देखते हुये प्रोन्नति की सीमा को 10 प्रतिशत से बढाकर 20 प्रतिशत किया जाये।
7. समस्त अभियन्त्रण विभागों में सहायक अभियन्ता के वित्तीय अधिकार बढाये जाय, जिसमें सहायक अभियन्ता को रू0 25.00 लाख तक की खुली निविदा व रू0 10.00 लाख तक की सीमित निविदा द्वारा अनुबन्ध गठित करने व अधिशासी अभियन्ताओं को रू0 10 लाख तक एवं सहायक अभियन्ताओं को रू0 5 लाख तक के कार्यादेश करने का अधिकार दिया जाये।
8. उत्तराखण्ड के तीनों ऊर्जा निगमों में राजकीय विभागों तथा अन्य निगमों की भांति कनिष्ठ अभियन्ता से सहायक अभियन्ता पद हेतु प्रोन्नति सीमा 40 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तथा डिग्रीधारी कनिष्ठ अभियन्ताओं के प्रोन्नति की सीमा 8.33 प्रतिशत से बढाकर 10 प्रतिशत की जाये।

9. विभिन्न अभियन्त्रण विभागों में विगत काफी लम्बे समय से प्रभारी सहायक अभियन्ता के रूप में कार्य कर रहे कनिष्ठ अभियन्ताओं को सेवानिवृत्त से पूर्व, अधिसंख्यक पदों के सापेक्ष वन टाईम प्रोन्नति का लाभ दिया जाये (प्रभारी सहायक अभियन्ता पूर्व से ही सहायक अभियन्ता के पद का वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं, जिस कारण इस प्रोन्नति से शासन पर कोई वित्तीय भार भी नहीं पडेगा)।
10.)
पी०एम०जी०एस०वाई० खण्डों हेतु लो०नि०वि० के पूर्व मे स्वीकृत रहें संवर्गीय / निसंवर्गीय खण्डों को पुर्नजीवित किया जाये एवं पी०एम०जी०एस०वाई० के कायर्यों हेतु लोक निर्माण विभाग को भी पूर्व की भांति कार्यदायी संस्था बनाया जाये।
11. उरेडा में वर्ष 2024 में नवनियुक्त कनिष्ठ अभियन्ताओं को ग्रेड पे0 4200 दी जा रही है जबकि प्रदेश के सभी विभागों में कनिष्ठ अभियन्ता का ग्रेड पे० 4600 है आपके संज्ञान में यह भी लाना है कि उक्त पदों की विज्ञप्ति ग्रेड पे0 4600 में कनिष्ठ
अभियन्ता भर्ती की जारी की गयी थी अतः उरेडा में भी कनिष्ठ अभियन्ताओं का ग्रेड पे0 4600 किया जाये।
12. राज्य के विकास में अति दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों एंव आपदा राहत कार्यों में पूर्ण समर्पण से कार्यरत अभियन्ताओं के कार्य के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने पर उन्हें सामाजिक सुरक्षा के रूप में न्यूनतम 2.00 करोड रूपये तक सामूहिक दुर्घटना बीमा सुविधा का लाभ दिया जाय।
13. अभियन्त्रण विभागों में ई-एस्टीमेट, ई-फाईलिंग अनिवार्य की जा रही है अतः विभागीय कार्यों हेतु अभियन्ताओं को लैपटोप / कम्प्यूटर उपलब्ध कराया जाये।
14. कृषि विभाग एवं जिला पंचायत में भी अन्य समस्त अभियन्त्रण विभागों की भांति सहायक अभियन्ता, अधिशासी अभियन्ता एवं अधीक्षण अभियन्ता यथोचित पद सृजित किये जाये। ग्रामीण निर्माण विभाग, लोक निर्माण विभाग, उत्तराखण्ड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड आदि समस्त अभियन्त्रण विभागों में तकनीकी पदों का पुर्नगठन किया जाये, जिससे विभागार्न्तगत निर्माण कार्यों में आ रही तकनीकी समस्याओं एवं पदोन्नति में ठहराव का समाधान हो सके।
15. वर्तमान में डिप्लोमा इंजीनियर्स संवर्ग से सम्बन्धित शासन के वित्त एवं कार्मिक विभाग द्वारा जारी होने वाले शासनादेशों को समस्त विभागों हेतुं लागू किये जाये। वर्तमान में वित्त एवं कार्मिक विभागों के शासनादेशों के पश्चात प्रशासनिक विभागों द्वारा अलग-अलग शासनादेश जारी किये जा रहे है। इस व्यवस्था पर अंकुश लगाया जाये।
16. गुणवत्ता सुधार हेतु सहायक अभियन्ता एवं उच्चतर अभियन्ताओं के तकनीकि दायित्वों का निर्धारण तथा तदनुरूप दण्ड की सम्यक् व्यवस्था करने हेतु समस्त अभियन्ताओं का तकनीकि दायित्व निर्धारण किया जाये।
17. गुणवत्ता नियन्त्रण हेतु समस्त अभियन्त्रण विभागों में आवश्यक प्रयोगशाला उपकरण व सहायकों की व्यवस्था की जाये तथा समस्त तकनीकी कार्मिकों को गुणवत्ता नियन्त्रण सम्बन्धी प्रशिक्षण दिया जाये।
18. ऊर्जा विभाग में भी अन्य विभागों की भांति दिनांक 01.10.2005 से पूर्व विज्ञप्ति के आधार पर नियुक्त अभियन्ताओं को पुरानी पेंशन का लाभ प्रदान किया जाये।
19. विभागीय अभियन्ताओं की ड्यूटी गैर तकनीकी कार्यों, जैसे परीक्षा पर्यवेक्षक, सैक्टर अधिकारी, कावड यात्रा में सेक्टर अधिकारी और चारधाम यात्रा में घोडे-खच्चर गिनने आदि कार्यों मे ना लगाई जाय (इन कार्यों हेतु विभागीय अभियन्ताओं का दायित्व निर्धारित किए जाने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति एवं विद्युत उत्पादन आदि प्रभावित होता है तथा आपदा, मानसून एवं बर्फवारी के दौरान मागाँ को सुरक्षित यातायात हेतु खोलने आदि का मूल कार्य बाधित होता है)।
20. स्थानान्तरण अधिनियम-2017 में महासंघ द्वारा प्रेषित सुझावों के अनुरूप न्यायपूर्ण संशोधन किया जाय अन्यथा की स्थिति में अभियन्त्रण विभागों के लिए अलग कार्य प्रकृति होने के कारण पूर्व की भांति स्थानान्तरण निति लागू की जाये। चेताया कि यदि जल्द उनकी माँगो पर कार्रवाई नही की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आज के धरना प्रदर्शन में उत्तराखण्ड डिप्लोमा इ० महासंघ के जनपद अध्यक्ष पौडी इ० कौशिद अली, शाखा सचिव शाखा कोटद्वार ३० तेजेन्द्र रावत, ३० दीपेन्द्र रावत, ३० मुनीश बावरा इं० सुदेश बिन्जोला इं० अजीत सिंह, इं० विपिन सैनी, इ० विजय लक्ष्मी रावत, इं० रोषराज इं० प्रदीप सैनी, इं० महेश काला, इं० गौरी शंकर, इं० प्रदीप मंमगाई, इ० शालु वर्मा, इ० राम सिहं, इं० सूर्य प्रकाश सहित अभियन्त्रण विभागों के सनस्त अभियन्तागण उपस्थित रहे।





